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ब्याज स्तुति व ब्याज निंदा अलंकार की परिभाषा, उदाहरण | Byaj Stuti & Byaj Ninda

ब्याज स्तुति व ब्याज निंदा अलंकार की परिभाषा एवं उदाहरण

ब्याज स्तुति अलंकार किसे कहते है?

परिभाषा –  ब्याज स्तुति अर्थात निंदा में प्रशंसा। जहां निंदा में स्तुति की जाती है वहां ब्याज निंदा अलंकार होता है।

उदाहरण – राजभोग से तृप्त न होकर मानो वे इस बार।
हाथ पसार रहे हैं जाकर जिसके ज-सके द्वार।।

उपर्युक्त उदाहरण है यशोधरा की इस युक्ति में महा बुद्ध के प्रति ‘हाथ पसार रहे हैं जाकर जिसके-जिसके द्वार’ कहकर निंदा की प्रतीत होती है लेकिन वास्तव में उनकी राज भोग का त्याग कर लोक सेवा भाव की प्रस्तुति की गई है।

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ब्याज निंदा अलंकार किसे कहते है?

परिभाषा – ब्याज निंदा अर्थात प्रशंसा में निंदा। जहां प्रशंसा में निंदा होती है वहां ब्याज निंदा अलंकार होता है।

ब्याज निंदा अलंकार के उदाहरण

उदाहरण – ऊधो तुम अति चतुर सुजान।
जे पहिले रंग रंगी स्याम रंग तिन्ह न चढ़ै रंग आन।।

ऊपर दिए उदाहरण में उद्धव की प्रशंसा में निंदा की गई है।

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